Saturday, April 10, 2010
अपनो को काटने में बहादुरी समझते है...नक्सली ?
Thursday, March 18, 2010
पथ से बिछड़ते लोग, समाज, मीडिया.....?
ये बहुत अजीब बात है कि आज हमारा समाज, मीडिया और सरकार किसी को सही दिशा में ले जाने का ध्यान नहीं है। लोगों का ध्यान ऐसी तरफ क्यों जा रहा है जहां से सिर्फ और सिर्फ हमारा नुकसान है समाज का नुकसान है। आज समाज के रक्षक ही भक्षक बन रहे हैं बड़ा ही सोचनीय बिषय है। इसके पीछे जिम्मेदार कोई और नहीं बल्कि हम खुद हैं।मैं बात कर रहा हूं कहने के लिए एक छोटी सी बात है लेकिन है बहुत बड़ी। बात है उन बच्चों की बच्चों के भविष्य की जो राजनीति का शिकार हो रहे हैं। जहां बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं वहां के बच्चों को स्कूल ले जाने की बात नहीं की जाती, उन्हे स्कूल की ओर कैसे ले जाया जाय इसकी बात नहीं की जाती, बल्कि बात ये की जाती है कि स्कूल में अब खाना नहीं दिया जाता खाना खराब दिया जाता है, खाने की क्वालिटी खराब है, बच्चों को मिलने वाले वजीफे को लोग बीच में रोक ले रहे हैं। ऐसी तमाम बातें की फालतू की जाती हैं,
अरे ध्यान उस तरफ दीजिए जहां से लोंगों का बिकास हो बच्चें पढ़े आगे बढ़े देश का बिकास हो फालतू की बातों में क्यों ध्यान दिया जा रहा है.....
Thursday, April 16, 2009
यह कैसी विडम्बना है ?
लेकिन एक बहुत बड़ी बिडम्बना यह भी है कि वह भी बेचारा किसी और के द्वारा नहीं बल्कि अपनों के द्वारा ही प्रताड़ित किया जाता है , उसे जिसने अपने अंदर अपने शरीर पर अपने रूप में मिलाया , बड़ा किया ,उसी के द्वारा छेदा जाता है ,और वह इसे सहन करता रहता है , लेकिन उसके पास मज़बूरी होती है ,वह मजबूर है वो कुछ कर नही सकता बस इसी में खुस रहता है कि इस आस में रहता है कि कोई एक दिन आयेगा और इससे मुक्ति दिलाएगा ,लेकिन क्या वह वहां से अर्थात कांटो से अलग होने के बाद भी अपने साथियों से बिछुड़ने का और प्रताड़ना का दंस उसे एक साथ झेलना पड़ेगा या फ़िर क्या होगा लेकिन बात साफ़ है कि फूल तो अपाहिज है ,
आज ऐसा लगता है कि फूल के जैसे ही हमारे देश के लोग भी अपाहिज हो गये हैं ,