नक्सलवाद, नक्सल आज की एक बड़ी समस्या के रूप में हमारे सामने आया है । छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के चिंतलनार की घटना ने तो हद ही कर दिया।जहां नक्सलियों ने ७६ जवानों को उड़ा, दिया मूली गाजर की तरह उन्हे काट दिया। इसे आप क्या समझेगें , क्या नक्सली एक उस बिगड़ैल बंदर की भांति हो गये हैं जो अपना जिसमें उसका बसेरा है उसे उजाड़ देता है। जैसे एक बिगड़ैल बंदर अपनी उस हरी भरी बगिया को उजाड़ कर बीरान बना देता है। आज नक्सली भी ठीक उसी तरह अपने ही लोगों को गाजर मूली की तरह काट देने में बहादुरी समझते हैं। ये किसे मार रहे हैं किसके खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं क्या करना चाहते हैं इससे इनका लक्ष्य है वे क्या दिखाना चाहते हैं देश की रक्षा करने वाले वीर सिपाहियों को अपना निशाना क्यों बना रहे हैं, असहाय लोगों की निर्मम हत्या कर देने उन्हें थोड़ा सा भी गुरेज नहीं होता॥ वे ऐसा कर क्या जताना चाहते हैं । इससे उन्हे क्या हासिल हो जाएगा । नक्सलियों यह कृत्य सोचनीय है ? लेकिन क्या नक्सली ऐसा तो नहीं सोचते
No comments:
Post a Comment