लाल आतंक की साजिश में फंसा पुलिस
विभाग
नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के बीच में
सेंध करके अपने लोगों को पहुंचाकर जहां उनकी रणनीति को समझ रहे हैं तो वहीं, उनसे गोला बारुद के साथ हथियार भी मंगवा रहे हैं., विभाग इनकी रणनीति से बेखबर रहा और नक्सलियों की काली करतूत से तब
वाकिफ हुए जब खुलेआम उनके साथ रहकर हथियार लेकर हुए फरार..।
-छत्तीसगढ़ में लाल आतंक का चेहरा और उसकी रणनीतियां खौफनाक होती जा
रही हैं। .जहां अब नक्सलियों ने एक नई रणनीति तैयार की है...आईबी और केन्द्रीय
गृहविभाग ने छत्तीसगढ़ शासन को एलर्ट भी किया है....कि जो नक्सली सरेंडर कर रहे
हैं उनकी जांच पड़ताल के बाद ही उन्हें जवानों की सेना में शामिल किया
जाए...छत्तीसगढ़ में अब तक सरेंडर किए नक्सलियों में 146 नक्सलियों को नौकरी दी गई
है जिसमें उन्हें एसपीओ, सिपाही और आरक्षक बनाया गया है...
वहीं अब तक छत्तीसगढ़ में 2632 नक्सलियों ने सरेंडर किया है या फिर पुलिस ने
उन्हें पकड़ा है जिसके बाद उन्होंने विचार धारा बदली है...सावधान करने के बाद भी
पुलिस विभाग की आंखें नहीं खुली और धमतरी में सरेंडर किए नक्सली दंपत्ति हथियार
गोलाबारुद लेकर एक महीने तक इनके बीच रहकर फरार हो गया..और साथ ले गए इनकी
रणनीतियां..।नक्सलियों की साजिस उनके घुसपैठ की जो सुरक्षा बलो के मुमेंट और उनकी
हर रणनीति को समझने के लिए वे ऐसा करते हैं ये विभाग की समझ से परे रहा है....।
खुफिया विभाग औऱ केन्द्रीय गृहविभाग ने रिपोर्ट दी कि घोर नक्सल
प्रभावित इलाकों के अधिकारी सतर्क हो जाएं और सरेंडर करने वाले नक्सलियों को परखने
के बाद ही उन्हें अपने साथ रखें....लेकिन देखा गया है कि कई नक्सलियों को सरेंडर
करने के बाद उन्हें सुरक्षा बलों के सामान रखा गया है....छत्तीसगढ़ में अब तक 2632
नक्सली सामने आ चुके हैं..जिसमें या तो उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया है या फिर
नक्सलियों ने पुलिस के सामने सरेंडर किया है..सरेंडर किए नक्सलियों को विशेष नीति
के आधार पर 146 नक्सलियों को सरेंडर करने के बाद एसपीओ, सिपाही और आरक्षक बनाया गया
है...जिन्होंने जवानों की तरह देश की रक्षा की कसमें खाई है...लेकिन इनके बीच में
अब नक्सलियों के भेदी भी पहुंच गए हैं...।
सरेंडर करने वाले नक्सलियों में कितने
नक्सली शामिल हुए
2005- 13 सरेंडर नक्सली बने एसपीओ
2006 में 5 नक्सलियों को बनाया गया
2007 में बड़ी तादात में – 90 नक्सलियों को बनाया गया
2008 – 5 नक्सली बने एसपीओ और सिपाही
2009- में 3 नक्सलियों को बनाया गया सिपाही
2010 में 4 को बनाया गया एसपीओ
2011 में 18 नक्सली बने आरक्षक और सिपाही
2012 में अब तक 9 नक्सलियों को बनाया जा चुका है आरक्षक और
नव आरक्षक बनाया गया है..।
इस तरह 146 लोगों को वर्दी दी
गई और जवानों की तरह इन्होंने भी देश की रक्षा की सौगंध खाई है....लेकिन यहां अब
होने लगी है साजिस... जहां नक्सलियों ने अपने लोगों को सरेंडर करवा कर जवानों में
शामिल करवाकर रहे है जासूसी करवा रहे हैं...इतना ही नहीं जानकारी तो ये भी आई है
कि ये नक्सलियों तक गोला बारुद और हथियार पहुंचाते हैं...बीच में जब नक्सलियों को
पुलिस ने गिरफ्तार किया और जब सुरक्षा बलों से इनकी मुठभेड़ हुई तो इनकी आंखें
खुली जिसके बाद सतर्क रहने को कहा गया...लेकिन ये तब भी नहीं नक्सलियों की चाल को
नहीं समझ पाए आंखे तब खुली जब दो नक्सली लंबे समय तक सरेंडर करने के बाद थाने में
रखे गोला बारुद हथियार लेकर फरार हो गए... वहीं एडीजी नक्सल ऑपरेशन राम निवास का
कहना है कि हमारे अधिकारी पूरी तरह से जांच पड़ताल के बाद ही उन्हें जिम्मेदारी
सौंपते हैं..तो आखिर इसे अब क्या कहें...कि नक्सलियों के रणनीति के
आगे उनकी रणनीतियों और साजिस के सामने अफसर बिफल रहे हैं...। नक्सलियों की साजिश
अब बेपर्दा हो गई है और उनका काला चेहरा भी सामने है...अब सवाल रहा है कि लगातार
नक्सलियों से मात खा रही छत्तीसगढ़ पुलिस अब जो घर के भेदिए हैं क्या उनसे निपट
पाएगी..या फिर उनकी साजिश में फंसेगी...या इनसे कैसे निपटेगी जो एक बड़ा सवाल उठ
खड़ा हुआ है..।
कमलेश पाण्डेय रायपुर

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