क्या यही हैं..छत्तीसगढ़ के पढ़ लिखे लोग और छत्तीसगढ़ सरकार का सच
बात सोचने वाली है कि छत्तीसगढ़ राज्य आंकड़ों में अपनी अर्थ व्यवस्था में सबसे उपर आने की बात कर रहा है..वहीं विकास में भी लगातार विकास की बात कर करता है। लेकिन ये बात सोचने वाली है और बड़ी बिडंबना है कि कहने को तो जिनसे आज बड़ी ही शर्मनाक गलती हुई है..गलती नहीं जिसे हम कहेंगे। जानबूझकर किया सीधा सीधा हत्या का प्रयास रहा है..
कहने को तो यहां के युवा पढ़े लिखे हैं। और कुछ ऐसे युवाओं की बात हम कर रहे हैं। जो पढ़े लिख ही नहीं वो पढ़े-लिखे... और नौकरीपेशा थे। लेकिन शिक्षा और संस्कार का उजाला... उनकी सोच में कहीं नहीं था ... बल्कि वो अंधविश्वास के अंधेरे में ही जीते रहे। फिर इसी अंधेरे में उन्होंने एक अपने से किया ... गुनाह। मामला कवर्धा जिले के तरेगांव की है... जहां तीन भतीजों ने मिलकर अपनी चाची को सिर्फ इसलिए सरेआम पीटा... कि उन्हें चाची के टोनही होने का शक था। अगर इतने में लोगों के अंदर से अंधविश्वास का चादर अगर उठ जाता तो क्या था। इससे भी बढ़कर और घिनौना अपराध हुआ जिसमें एक दो नहीं पूरा गांव और गांव के दर्जनों लोगों ने इस वारदात को अंजाम दिया..।मामला है जांजगीर जिले के सिवनी में टोनही होने का आरोप लगने के बाद गांव की 30 महिलाओं को अग्निपरीक्षा देकर... खुद को बेकसूर साबित करना पड़ा। अग्निपरीक्षा पार करने के लिए... बैगा ने 30 महिलाओं को केंवाच की जड़ें घोलकर पिला दी। इन महिलाओं ने खुद को बेकसूर साबित करने के लिए अपने आपको मौत के मुंह में ढकेल
सरगुजा के एक बेटे को शक था कि उसकी मां टोनही है..और वो उसके बच्चों की दुश्मन है..अगर उसने मां का खून नहीं किया तो वो उसके बच्चों को मारडालेगी.. इस अंधविश्वास के चलते..इस कलयुगी बेटे ने मां की हत्या कर दी..इस कातिल बेटे को कोर्ट भले ही मौत की सजा दे दे लेकिन उसने जो मां के आंचल पर जो खून के छींटे लगाए हैं शायद उस गुनाह की सजा इस जहां में नहीं। |
लिया।सिवनी गांव में रहने वाली इन महिलाओं पर टोनही होने का आरोप लगा। फिर गांव के बैगाओं ने महिलाओं के सामने ये शर्त रखी कि अगर वो बेकसूर हैं, तो उनकी दी दवा पी लें। मजबूर महिलाओं ने खुद को बेकसूर साबित करने के लिए... केंवाच की जड़ें घोलकर बनाई गई दवा पी ली। भूत भगाने के नाम पर गांव में शुरू हुआ ये ढोंग.. 30 महिलाओं को मौत के मुंह तक ले आया था। जिसमें एक महिला की मौके पर ही मौत भी हो गई। आज छत्तीसगढ़ के इन पिछड़े इलाकों में चाहे कोई बीमार हो या किसी के घर में कोई भी अनहोनी हो चाए इल्जाम इन्हीं अभागनों के सर फूटता है। वारदात होने के बाद पुलिस मामला दर्ज करती और मामले की गोलमटोल कार्रवाई कर खुद भी इन्हीं अंधविश्वासों में जकड़ कर रह जाती है। छत्तीसगढ़ के लोग अंधविश्ववास में इतने अंधे हो गए हैं कि एक बेटा जो कि अएनी मां को अपना दुश्मन समझने लगा था। इस बेटे ने अपनी मां की धारदार हथियार से अपने रिस्तेदारों के साथ मिलकर अपने मां की हत्या कर दी..सरगुजा जिले के रहने वाले इस कलयुगी बेटे ने अपनी मां के खून से अपने आप को रंग चुका है।
वैसे दो छत्तीसगढ़ सरकार ने टोनही प्रताड़ना रोकने के लिए कानून तो पास कर दिया। पुलिस को कार्रवाई के लिए तैनात भी कर दिया। लेकिन फिर भी राज्य में टोनही के नाम पर होने वाली यातनाएं कम नहीं हुई हैं। आदिवासी बहुल इलाकों में आज भी ऐसे ही चौराहे पर महिलाओं को मौत दी जाती है।
yeh chattisgarh hai pandey ji yahan afsarsaahi chalti yahan chawal aur namak ke aadhar par vote daalne waalon ki sankhya acchi khaasi hai isliye sahi vyakti nahi chuney jaa rahe hain aane waale 20 saalon tak abhi isi tarah se hukmraanon ke band paati main saans lena padega
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