Wednesday, August 28, 2013

लाल आंतक के मंसूबे, कमलेश पाण्डेय।


  1.                     लाल आंतक के मंसूबे

    नक्सलियों ने जीरम घाटी हमले में अपनाई लिट्टे की तकनीक
    लिट्टे से ली ट्रेनिंग और फिलीपींस और फ्रांस से मैनेजमेंट सीखा
    और हथियार लिया चीन से
नक्सली अब अंतर्राष्ट्रीय विद्रोही संगठनों से सांठगांठ कर रहे हैं...,
झीरम घाटी में हुए देश के सबसे बड़े नक्सली हमले में आंकलन के बाद ये
बातें सामने आती हैं...वारदातों को अंजाम देने वाले नक्सली अब फिलीपींस,
और फ्रांस से मैनेजमेंट गुर सीख चुके हैं तो विश्व के सबसे बेहतरीन
लिट्टे से ट्रेनिंग लेकर दक्ष हो चुके हैं....जिन्हें हथियार मिलता है
चीन से और माध्यम बन रहा है विश्व का सबसे बड़ा नक्सली संगठन अंब्रेला
ग्रुप.... 25 मई को हुए नक्सली हमले में कांग्रेश कार्यकर्ताओं सहित 33
लोगों की जानें गई तो इतने ही लोग इस हमले में गंभीर रुप से जख्मी
हुए...।। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों पर नियंत्रण, उनके पैर उखड़ने जैसे
सरकारी दावों के विपरीत सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले दस सालों के
अंदर नक्सलियों की ताकत 10 गुना बढ़ चुकी है। केंद्रीय और स्थानीय खुफिया
एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक इस बीच प्रशिक्षित हथियारबंद नक्सलियों
की संख्या एक हजार से बढ़कर 10 हजार हो चुकी है। तो वहीं नक्सलियों
नक्सलियों की ट्रेनिंग इंटरनेशनल लेबल की हो गई है जिसमें नेटवर्क
भी..वहीं नक्सलियों के टॉप कमांडरों को ट्रेनिंग मिली है खूंखार आतंकी
संगठन लिट्टे के कमांडरों…
    लिट्टे के लड़ाकों का आतंक
      लिट्टे के लड़ाकों ने दिया नक्सलियों को ट्रेनिंग
      नक्सलियों की बनी 10 कंपनी बटालियन
      पीपुल्स लिबरेशन आर्मी दिया नक्सलियों बटालियन को नाम

लाल आतंकी अब इतने ताकतवर हो गए हैं कि उनसे मामूली हथियारों और नार्मल
ट्रेनिंग मिले जवानों को मोर्चे पर लगाना नाकाफी होगा...उन पर जीतना अब
संभव इन हालातों में नहीं रहा है...।नक्सली अब भारत के नौ राज्यों ही
नहीं बल्कि 27 देशों में अपना नेटवर्क फैला लिया है...

25 मई को दरभा की जीरम घाटी में हमले के बाद सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां
माओवादियों की टोह लेने में जुटी हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार
खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के हाथ जो सुराग लगे हैं, उनके अनुसार
माओवादियों ने इस हमले में लिट्टे की तकनीक का उपयोग किया था। इससे
स्पष्ट है कि वे लिट्टे से ट्रेनिंग ले चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है
कि विदेशों से मिली विशेष ट्रेनिंग के कारण ही वे वारदात कर निकल गए और
खुफिया व सुरक्षा एजेंसियां कुछ नहीं कर पाई।

देश के खुफिया एजेंसियों के मुताबिक साल 2012 में सुरक्षा बलों के हाका
ऑपरेशन को असफल करने के बाद माओवादी बड़ी वारदात के फिराक में थे। बताया
जा रहा है कि हाका ऑपरेशन असफल करने के पीछे भी लिट्टे और माओवादियों की
मिलीभगत थी। 2012 में नक्सली नारायणपुर अबूझमाड़ में नक्सल कांग्रेस
अधिवेशन करना चाह रहे थे लेकिन सफल नहीं हुए जिसके चलते कई बड़े
नक्सलियों के नेता छत्तीसगढ़ से बैरंग लौट गए थे...हाका ऑपरेशन चलाए जाने
से बौखलाए नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ को दहलाने की ठानी थी..  श्रीलंका में
लिट्टे के बिखराव के बाद लंदन के अम्ब्रेला ग्रुप ने माओवादियों के साथ
हाथ मिलाया था। जानकार बताते हैं कि डेढ़ दशक से माओवादियों को लिट्टे की
ट्रेनिंग व फिलीपीन्स से मैनेजिंग में दक्ष बनाने की योजना बनाई गई।

लंदन के नक्सली संगठन अंब्रेला ग्रुप ने जिनके माध्यम से सहयोग मिला
फिलीपींस, बांग्ला, पेरु, टर्की, नेपाल औऱ अफगानिस्तान के नक्सलियों
से...वहीं छत्तीसगढ़ नक्सली पहुंचते हैं नेपाल के रास्ते जिन्हें नेपाल
के लाल आतंकियों के सरगना उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के रास्ते
पहुंचाते हैं तो ये मध्यप्रदेश का जिला सिंगरौली औऱ सीधी चुनते हैं
ट्रेनिंग के लिए वहीं से रास्ता तय करते हुए छत्तीसगढ़ तो मणिपुर,
नागालैंड, त्रिपुरा के नक्सलियों के माध्यम से जो नेपाल मुख्या रास्ता है
उसके रास्ते भी कभी झारखंड तो कभी उड़ीसा के रास्ते आसानी से घुसते
हैं...।।

लिट्टे की तर्ज पर नया नाम
विदेशियों का साथ मिलने के बाद पिछले तीन सालों में राज्य में माओवादियों
की ताकत 20 गुना बढ़ गई है। माओवादियों ने गौरिल्ला आर्मी का नाम बदलकर
पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी रख लिया है। यह नाम लिब्रेशन टाइगर्स ऑफ तमिल
(लिट्टे) की तर्ज पर रखा गया है। गौरतलब है कि अलगाववादी लिट्टे ने तमिल
भाषियों के लिए अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर श्रीलंका में 1983 से
2009 तक हिंसा की थी। 2009 में श्रीलंका की सेना ने लिट्टे को ध्वस्त कर
दिया।



मैनपाट भी निशाने पर?
खुफिया सूत्रों के अनुसार माओवादियों के निशाने पर मैनपाट भी है। सूत्रों
की मानें तो जशपुर और सरगुजा इलाके में भी माओवादियों की पैठ बन चुकी है।
भले इन क्षेत्रों को एक बाद माओवादियों के चंगुल से मुक्त करा लिया गया
था, लेकिन वहां इनके दोबारा सक्रिय होने की सूचना है।




ये सीखा लिट्टे के कमांडों से-------
एंबुस लगाना, बारुदी विस्फोट, गुरुल्ला युद्ध नीति, जिसका छत्तीसगढ़
पुलिस आजतक तोड़ नहीं निकाल पाई है....।।

 सबसे घातक मिलिटरी इकाई पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) ने
छत्तीसगढ़ में 10 कंपनी बटालियन बना ली है । वे लगातार इलाके का विस्तार
और सदस्यों की संख्या बढ़ा रहे हैं। एक माह पहले ही उन्होंने कांकेर और
राजनांदगांव के इलाके को मिलाकर नया डिवीजन बनाया है।
हाल में हुई कुछ मुठभेड़ों के आधार पर राज्य के गृहमंत्री ननकीराम कंवर
ने दावा किया था कि नक्सली कमजोर पड़े हैं। उनके पैर उखड़ने लगे हैं। ।
खुफिया एजेंसियों ने पिछले 10-11 सालों में नक्सलियों की ताकत पर एक
रिपोर्ट तैयार की है। इसमें कहा गया है कि उनका पूरा जोर बड़े हमलों की
जगह छोटे हमले, अपनी ताकत बढ़ाने और इलाका विस्तार पर है।


वहीं नक्सलियों ने इनके देखते देखते बेहतरीन फोर्स की 10 बटालियन बना ली
जिसे लिबरेशन आर्मी नाम दिया है जिसमें दो कंपनी सुकमा दंतेवाड़ा और
बीजापुर इलाके में काम कर रही है तो 2 राजनांदगांव बार्डर गढ़चिरौली
में...। एक ऐसी कंपनी बटालियन जिसके एक कंपनी जवानों की कई कंपनियों पर
भारी पड़ते हैं...।।

नक्सली इस बीच आधुनिकता, ताकत बढ़ाने, राजनीतिक तौर पर मजबूती, और
इंटरनेशनल लेबल पर मजबूत हो रहे हैं...पुरानी चीजें बरकरार हैं....जो
नक्सलियों की असल ताकत गुरिल्ला लड़ाई में पारंगत उनकी मिलिटरी कंपनियां
हैं। इसमें एके 47, एके57, लाइट मशीनगन और टू इंच मोर्टार से लैस लड़ाके
हैं। ताड़मेटला जैसे बड़े हमलों को अंजाम देने वाली इन कंपनियों में अभी
करीब 10 हजार लड़ाके हैं। 65 से 100 सदस्यों के साथ चलने वाली ये
कंपनियां घात लगाकर हमला करती हैं तो 3-4 सौ जवानों पर भारी पड़ती हैं।
जंगल वॉरफेयर के

साल, 2003,     2013
डिवीजन  4       12
बटालिनय  0      2
कंपनियां  2      10
प्लाटून    6       41
लोकल गुरिल्ला  30   110
जनताना सरकार       0    245 से ज्यादा
हथियार बंद सदस्य      1000    10000 से ज्यादा
हथियार फैक्ट्रियां        140      500 से ज्यादा


लोकल गुरिल्ला स्क्वॉड     25- 30
कंपनी                  65-80
बटालियन             350 से 450



    नक्सली 2052 में दिल्ली की गद्दी पर काबिज होना चाहते हैं, जहां
नक्सलियों ने अपने नौवें कांग्रेस अधिवेशन में ये एजेंडा तैयार किया था,
जिसके लिए विदेशी ताकतों से मिलकर अंजाम तक पहुंचने की तैयारी कर रहे
हैं,  सुकमा जिले के दरभा घाटी में हुए देश के सबसे बड़े हमले के बाद
छत्तीसगढ़ में देश के प्रधानमंत्री से लेकर कई एजेसियों सहित विभागों के
प्रमुखों ने दौरा किया, जिसमें फैसला हुआ कि केन्द्र सरकार रणनीतियों के
आधार पर हर राज्य की नक्सलियों को खत्म करने के लिए मदद करेगा जिसमें
फोर्स के साथ साथ आधुनिक हथियार भी मुहैया कराएगा, तो नक्सलियों के टॉप
मोस्ट नक्सलियों को मारने का भी जिम्मा दिया है राज्यों को जो देश की
अशांति छीन चुके हैं जिनमें गनपति उर्फ गणेशा उर्फ रमन्ना जिसके उपर 51
लाख का इनाम है, तो मल्ला जुला पर 12 लाख का इनाम, मिशीर बसरा पर 10 लाख
का इनाम घोषित किया गया है, इसके अलांवा गगन उर्फ देवन्ना पर भी 10 लाख
का इनाम है वहीं सहदेव पर पांच लाख रुपए का इनाम सरकारों ने रखा है तो
प्रकाश उर्फ दमरन्ना पर 10 लाख का इनाम है ऐसे दो दर्जन नक्सली हैं जिनको
मारने का राज्य सरकारों को जिम्मा अब केन्द्र सरकार ने दिए है...।.
  
                                                                                           कमलेश पाण्डेय।

Saturday, July 28, 2012

छत्तीसगढ़ भ्रष्ट अफसरों का पनाहगाह...?




                मंत्री का अजीब बयान सुनकर लोग आश्चर्य में रह जाएंगे...कहा क्या करें अगर कार्रवाई कर देंगे तो प्रदेश का काम ही खत्म हो जाएगा,, तो कहते हैं कि बड़े अफसर कमिश्नर हो गए हैं उन पर मै कार्रवाई नहीं कर सकता..।


 छत्तीसगढ़ भ्रष्ट अफसरों का पनाहगार बन गया है....जहां अंत्यावसायी सहकारी विकास निगम के सभी 18 जिलों के अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं...जिनके खिलाफ गबन, आर्थिक अपराध, धोखाधड़ी जैसे कई मामले दर्ज हैं...उसके बाद भी उनका प्रमोशन किया जा रहा है...सवाल किसी अधिकारी के प्रमोशन पर खड़ा नहीं हुआ उससे बड़ा सवाल बना प्रदेश के इसी विभाग के मंत्री का बयान जब इस बारे में मैंने उन्हें बताया कि इतना भ्रष्टाचार व्याप्त है कुछ कीजिए तो उन्होंने हंसते बड़े उदासीनता भरे लहजे में कहा कि क्या करें पूरे प्रदेश के अधिकारी के अपराधी हैं..सभी पर कार्रवाई कर देंगें को प्रदेश का काम काज कैसे चलेगा...इन अफसर शायद ये जानते हैं कि उनके मंत्री तो ऐसे ही हैं जिन्हें कुछ पता ही नहीं चलेगा आदिवासी इलाके आए हैं...कुछ समझेंगें ही नहीं कि गबन, और धोखाधड़ी का मतलब क्या होता है...अपराध और भ्रष्टाचार तो केवल लोगों से सुने होंगे...लेकिन मंत्री जी का बयान देकर ये शायद जताना चाहते हैं कि उन्हें सब पता है...लेकिन उनके बयान पर सवालिया निशान जरुर लग गया...उन्हीं की बात उन्हीं की जुबानी कुछ इस तरह..
.उनका कहना है कि यदि हम 18 जिलों के सभी भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई कर देंगे तो काम कैसे चलेगा....हमारा तो काम काज बी ठप्प हो जाएगा...अब ऐसे में काम चलाने के लिए इन पर कार्रवाई नहीं कर सकते ...जहां ज्यादा भ्रष्टाचार की बात है तो देखते हैं जो ज्यादा भ्रष्टाचार कर रहा होगा उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे...अब क्या कहें ऐसे मंत्री जी को उनकी ये लाचारी है या...बेकूफी जो उन्हें ये बताने में फक्र महसूस हो रहा है कि उनके विभाग में कितना भ्रष्टाचार व्याप्त है...वैसे खुशी भी होती होगी कि सभी क्रिमिनल भी जो उनसे लोग डरते भी होंगे...ये छत्तीसगढ़ के मंत्री हैं अनुसूचित जनजाति विभाग के केदार कश्यप जिनके विभाग में ऐसा है और उन्होने ऐसा कुछ बयान दिया...क्या कहें अब ज्यादा इनके बारे में बेचारे लाचार हैं...करें भी तो क्या करें सभी तरफ से परेशान होंगे..मतलब..।??????????


कमलेश पाण्डेय, रायपुर

लाल आतंक की साजिश-----------?


    
 लाल आतंक की साजिश में फंसा पुलिस विभाग
नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के बीच में सेंध करके अपने लोगों को पहुंचाकर जहां उनकी रणनीति को समझ रहे हैं तो वहीं, उनसे गोला बारुद के साथ हथियार भी मंगवा रहे हैं., विभाग इनकी रणनीति से बेखबर रहा और नक्सलियों की काली करतूत से तब वाकिफ हुए जब खुलेआम उनके साथ रहकर हथियार लेकर हुए फरार..।
 -छत्तीसगढ़ में लाल आतंक का चेहरा और उसकी रणनीतियां खौफनाक होती जा रही हैं। .जहां अब नक्सलियों ने एक नई रणनीति तैयार की है...आईबी और केन्द्रीय गृहविभाग ने छत्तीसगढ़ शासन को एलर्ट भी किया है....कि जो नक्सली सरेंडर कर रहे हैं उनकी जांच पड़ताल के बाद ही उन्हें जवानों की सेना में शामिल किया जाए...छत्तीसगढ़ में अब तक सरेंडर किए नक्सलियों में 146 नक्सलियों को नौकरी दी गई है जिसमें उन्हें एसपीओ, सिपाही और आरक्षक बनाया गया है... वहीं अब तक छत्तीसगढ़ में 2632 नक्सलियों ने सरेंडर किया है या फिर पुलिस ने उन्हें पकड़ा है जिसके बाद उन्होंने विचार धारा बदली है...सावधान करने के बाद भी पुलिस विभाग की आंखें नहीं खुली और धमतरी में सरेंडर किए नक्सली दंपत्ति हथियार गोलाबारुद लेकर एक महीने तक इनके बीच रहकर फरार हो गया..और साथ ले गए इनकी रणनीतियां..।नक्सलियों की साजिस उनके घुसपैठ की जो सुरक्षा बलो के मुमेंट और उनकी हर रणनीति को समझने के लिए वे ऐसा करते हैं ये विभाग की समझ से परे रहा है....।
 खुफिया विभाग औऱ केन्द्रीय गृहविभाग ने रिपोर्ट दी कि घोर नक्सल प्रभावित इलाकों के अधिकारी सतर्क हो जाएं और सरेंडर करने वाले नक्सलियों को परखने के बाद ही उन्हें अपने साथ रखें....लेकिन देखा गया है कि कई नक्सलियों को सरेंडर करने के बाद उन्हें सुरक्षा बलों के सामान रखा गया है....छत्तीसगढ़ में अब तक 2632 नक्सली सामने आ चुके हैं..जिसमें या तो उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया है या फिर नक्सलियों ने पुलिस के सामने सरेंडर किया है..सरेंडर किए नक्सलियों को विशेष नीति के आधार पर 146 नक्सलियों को सरेंडर करने के बाद एसपीओ, सिपाही और आरक्षक बनाया गया है...जिन्होंने जवानों की तरह देश की रक्षा की कसमें खाई है...लेकिन इनके बीच में अब नक्सलियों के भेदी भी पहुंच गए हैं...।
सरेंडर करने वाले नक्सलियों में कितने नक्सली शामिल हुए
     2005- 13 सरेंडर नक्सली बने एसपीओ
     2006 में 5 नक्सलियों को बनाया गया
     2007 में बड़ी तादात में  90 नक्सलियों को बनाया गया
     2008  5 नक्सली बने एसपीओ और सिपाही
     2009- में 3 नक्सलियों को बनाया गया सिपाही
     2010 में 4 को बनाया गया एसपीओ
     2011 में 18 नक्सली बने आरक्षक और सिपाही
     2012 में अब तक 9 नक्सलियों को बनाया जा चुका है आरक्षक और नव आरक्षक बनाया गया है..।
इस तरह 146 लोगों को वर्दी दी गई और जवानों की तरह इन्होंने भी देश की रक्षा की सौगंध खाई है....लेकिन यहां अब होने लगी है साजिस... जहां नक्सलियों ने अपने लोगों को सरेंडर करवा कर जवानों में शामिल करवाकर रहे है जासूसी करवा रहे हैं...इतना ही नहीं जानकारी तो ये भी आई है कि ये नक्सलियों तक गोला बारुद और हथियार पहुंचाते हैं...बीच में जब नक्सलियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया और जब सुरक्षा बलों से इनकी मुठभेड़ हुई तो इनकी आंखें खुली जिसके बाद सतर्क रहने को कहा गया...लेकिन ये तब भी नहीं नक्सलियों की चाल को नहीं समझ पाए आंखे तब खुली जब दो नक्सली लंबे समय तक सरेंडर करने के बाद थाने में रखे गोला बारुद हथियार लेकर फरार हो गए... वहीं एडीजी नक्सल ऑपरेशन राम निवास का कहना है कि हमारे अधिकारी पूरी तरह से जांच पड़ताल के बाद ही उन्हें जिम्मेदारी सौंपते  हैं..तो आखिर इसे अब क्या कहें...कि नक्सलियों के रणनीति के आगे उनकी रणनीतियों और साजिस के सामने अफसर बिफल रहे हैं...। नक्सलियों की साजिश अब बेपर्दा हो गई है और उनका काला चेहरा भी सामने है...अब सवाल रहा है कि लगातार नक्सलियों से मात खा रही छत्तीसगढ़ पुलिस अब जो घर के भेदिए हैं क्या उनसे निपट पाएगी..या फिर उनकी साजिश में फंसेगी...या इनसे कैसे निपटेगी जो एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है..।

कमलेश पाण्डेय रायपुर

Saturday, May 7, 2011

क्या यही हैं..छत्तीसगढ़ के पढ़ लिखे लोग और छत्तीसगढ़ सरकार का सच


          क्या यही हैं..छत्तीसगढ़ के पढ़ लिखे लोग और छत्तीसगढ़ सरकार का सच

बात सोचने वाली है कि छत्तीसगढ़ राज्य आंकड़ों में अपनी अर्थ व्यवस्था में सबसे उपर आने की बात कर रहा है..वहीं विकास में भी लगातार विकास की बात कर करता है। लेकिन ये बात सोचने वाली है और बड़ी बिडंबना है कि कहने को तो जिनसे आज बड़ी ही शर्मनाक गलती हुई है..गलती नहीं जिसे हम कहेंगे। जानबूझकर किया सीधा सीधा हत्या का प्रयास रहा है..
 कहने को तो यहां के युवा पढ़े लिखे हैं। और कुछ ऐसे युवाओं की बात हम कर रहे हैं। जो पढ़े लिख ही नहीं  वो पढ़े-लिखे... और नौकरीपेशा थे। लेकिन शिक्षा और संस्कार का उजाला... उनकी सोच में कहीं नहीं था ... बल्कि वो अंधविश्वास के अंधेरे में ही जीते रहे। फिर इसी अंधेरे में उन्होंने एक अपने से किया ... गुनाह। मामला कवर्धा जिले के तरेगांव की है... जहां तीन भतीजों ने मिलकर अपनी चाची को सिर्फ इसलिए सरेआम पीटा... कि  उन्हें चाची के टोनही होने का शक था। अगर इतने में लोगों के अंदर से अंधविश्वास का चादर अगर उठ जाता तो क्या था। इससे भी बढ़कर और घिनौना अपराध हुआ जिसमें एक दो नहीं पूरा गांव और गांव के दर्जनों लोगों ने इस वारदात को अंजाम दिया..।मामला है जांजगीर जिले के सिवनी में टोनही होने का आरोप लगने के बाद गांव की 30 महिलाओं को अग्निपरीक्षा देकर... खुद को बेकसूर साबित करना पड़ा। अग्निपरीक्षा पार करने के लिए... बैगा ने 30 महिलाओं को केंवाच की जड़ें घोलकर पिला दी। इन महिलाओं ने खुद को बेकसूर साबित करने के लिए अपने आपको मौत के मुंह में ढकेल
सरगुजा के एक बेटे को शक था कि उसकी मां टोनही है..और वो उसके बच्चों की दुश्मन है..अगर उसने मां का खून नहीं किया तो वो उसके बच्चों को मारडालेगी.. इस अंधविश्वास के चलते..इस कलयुगी बेटे ने मां की हत्या कर दी..इस कातिल बेटे को कोर्ट भले ही मौत की सजा दे दे लेकिन उसने जो मां के आंचल पर जो खून के छींटे लगाए हैं शायद उस गुनाह की सजा इस जहां में नहीं।
                                                                

लिया।सिवनी गांव में रहने वाली इन महिलाओं पर टोनही होने का आरोप लगा। फिर गांव के बैगाओं ने महिलाओं के सामने ये शर्त रखी कि अगर वो बेकसूर हैं, तो उनकी दी दवा पी लें। मजबूर महिलाओं ने खुद को बेकसूर साबित करने के लिए... केंवाच की जड़ें घोलकर बनाई गई दवा पी ली। भूत भगाने के नाम पर गांव में शुरू हुआ ये ढोंग.. 30 महिलाओं को मौत के मुंह तक ले आया था। जिसमें एक महिला की मौके पर ही मौत भी हो गई। आज छत्तीसगढ़ के इन पिछड़े इलाकों में चाहे कोई बीमार हो या किसी के घर में कोई भी अनहोनी हो चाए इल्जाम इन्हीं अभागनों के सर फूटता है। वारदात होने के बाद पुलिस मामला दर्ज करती और मामले की गोलमटोल कार्रवाई कर खुद भी इन्हीं अंधविश्वासों में जकड़ कर रह जाती है। छत्तीसगढ़ के लोग अंधविश्ववास में इतने अंधे हो गए हैं कि एक बेटा जो कि अएनी मां को अपना दुश्मन समझने लगा था। इस बेटे ने अपनी मां की धारदार हथियार से अपने रिस्तेदारों के साथ मिलकर अपने मां की हत्या कर दी..सरगुजा जिले के रहने वाले इस कलयुगी बेटे ने अपनी मां के खून से अपने आप को रंग चुका है।
  वैसे दो छत्तीसगढ़ सरकार ने टोनही प्रताड़ना रोकने के लिए कानून तो पास कर दिया। पुलिस को कार्रवाई के लिए तैनात भी कर दिया। लेकिन फिर भी राज्य में टोनही के नाम पर होने वाली यातनाएं कम नहीं हुई हैं। आदिवासी बहुल इलाकों में आज भी ऐसे ही चौराहे पर महिलाओं को मौत दी जाती है।

Friday, January 7, 2011

रिस्तों का खून------कत्ल की भूंख-----?

  कैसे -कैसे लोग हो गए हैं आज...क्या कहेंगे आप इन लोगों के बारे में ....अजीब बात है लोगों को अपने खून नहीं अपना खून देने खून का निर्माण करने वाले बनाने वाले को ही इतनी आसानी से मार देते हैं ..उनकी हत्या कर देते हैं..उन्हे अपने को सिंचित करने वाले को ही कितनी आसानी से मार देते हैं....इतना ही नहीं समाज को दिशा देने वाले...समाज को सीख देना भी उनके लिए क्या गुनाह बन जाता है..ऐसा ही एक वाकया है छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर जिले में एक शिक्षक द्वारा कुछ युवकों को लड़की छेड़ने से मना करने पर युवकों ने शिक्षक की हत्या कर दी..क्या कहेंगे...आज समाज में लोगों को सही बातें बुरी लगने लगी हैं..या किसी की जान ले लेने में तनिक भी संकोच नहीं होता..कि आज के लोग इसी तरह के खूनी प्रवृत्ति के हो गए हैं....यही नहीं छत्तीसगढ़ में दरिंदे बेटे ने अपने मां की बड़ी ही बेरहमी से टंगिया (लकड़ी और लोहे से बना हथियार) से मारकर हत्या कर दी...ये घटनाएं आज के लोगों के लिए आम बात हो गई  है...।
             ये क्या हो गया है लोगों को ...क्या कर रहे हैं...आज राजनीति में आम बात  हो गई है..चुनाव जीतने के लिए किसी अपने का खून करने में कोई भी दिक्कत नहीं होती...इन्हे तो हम नहीं बदल पा रहे हैं लेकिन जब हम अपने आप को सामाजिक मानते हैं और कहते हैं कि समाज में हमारी इज्जत है..हम समाज को आइना दिखाने वाले हैं तो..हम ही से ऐसी वारदातें ...हमें सोचने पर मजबूर कर देती हैं।
  लोग आज किसी अपरचित नहीं अपने ही रिस्तों खून कर दे रहें हैं...रिस्ते कोई दूर का रिस्ता नहीं रहा..आज तो भाई- भाई का कत्ल कर दे रहा है..बाप बेटे का और बेटा- बाप का बड़ी ही बेरहमी से मार देता है..क्या कहेंगे..कोई इतनी बड़ी बात नहीं रहती है वहां...क्या ये सब देखकर सुनकर आपका मन तोड़ा सा बिचलित नहीं होता...आज वाकई में कठिन घ़ड़ी आ गई है..रिस्तों को गाजर मूली तरह काटने वाले लोगों को क्या कहेंगे...समाज आज किस दिशा में जा रहा..इसके पीछे क्या- क्या कारण हो सकते हैं...किसको पुकारा जाए इसे रोकने के लिए...।

कमलेश पाण्डेय

Tuesday, November 30, 2010

दिमागी लंगडा राजा और लोकतंत्र

चुनाव आते ही सभी लोग अलग अलग दलों में अपना ठिकाना खोजने में लग जाते हैं !चेहरे वही पुराने बस पार्टी बदल जाती है,सिद्धांत बदल जाते हैं,बदल जाता है नजरिया ,कल तक जो अपने थे वही बेगाने हो जाते हैं!खैर छोडिये राजनीती है सब जायज है,
गठबंधन करके दल अपनी सरकार तो बना लेते हैं...लेकिन इस गठबंधन के बदले छोटे दलों के आगे सरकार नाक रगड़ती नजर आती है...वर्तमान सन्दर्भ में भी यही बात सच होती दिखाई दे रही है....प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सब कुछ देखते हुए भी अनजान बने रहे और अभी भी हालत में उनकी सुधार नहीं है...मतलब ए.राजा के मामले में वे चुप्पी साधे हुए है...शायद कारण यही है कि ए.राजा की पार्टी उनकी सरकार को साधे है.
वर्तमान में लोकतंत्र की दशा को व्यक्त करती एक कहानी याद आ गई सो उसे आप लोगों के सामने परोस रहा हूँ.
एक हंस-हंसिनी का बड़ा सुंदर जोड़ा था,दोनों में बड़ा प्रेम था!मजे से दिन कट रहे थे !एक दिन दोनों ने नीलगगन में सैर करने की सोची,दोनों सैर करते करते काफी दूर निकल गए!रात हो गई थी सोचा रात यही गुजार कर सुबह चलते है!एक बरगद का पेड़ दिखाई दिया,दोनों वहां पहुचे!उस बरगद के पेड़ पर एक उल्लू रहता था !हंस ने उल्लू से रात गुजारने की बात कही,उल्लू ने अनुमति दे दी!कहा कोई बात नही!सुबह जब हंस-हंसिनी उठ कर जाने लगे तब उल्लू ने हंसिनी को पकड़ लिया, कहा अब हंसीं मेरी है!हंस ने बड़ी विनती की लेकिन उल्लू नही माना,अब हंस ने राजा के दरबार में गुहार लगायी!राजा ने उल्लू को बुलाया,कहा उल्लू,हंसिनी हमेशा हंस की होती है,उल्लू की कभी नही हो सकती !ये जोड़ा बेमेल है!उल्लू ने कहा -हंसिनी मेरी है,यदि आपने ऐसा निर्णय नही दिया तो मै किले की प्राचीर पर बैठ कर आपके काले कारनामों का चिटठा खोल दूंगा !अब राजा डर गया!उसका निर्णय बदल गया,उसने कहा-हंस,अब हंसिनी उल्लू की है!तुम घर जाओ!हंस रोते हुए उदास मन से जाने लगा !अब उल्लू भी रो रहा था!हंस ने पूंछा-तुम क्यों रो रहे हो?मेरी हंसिनी मुझसे छीन गई है,मेरे रोने का कारण तो समझ में आता है,लेकिन तुम क्यों रो रहे हो?उल्लू बोला- में लोक तंत्र की दशा पर रो रहा हूँ,एक सिरफिरे के कारण राजा ने अपना निर्णय बदल दिया!एक धमकी से राजा ने अन्याय को जीता दिया!भ्रष्टाचार को बढ़ावा इन धमकियों के कारण ही शायद मिल रहा है...क्या होगा इस देश का?इसलिए मै रो रहा हूँ!यही हाल है पूरे देश में,अब जनता को सोचना है अगली सरकार उन्हें कैसी बनानी है!
..........................जवाबों की आस में
- कृष्ण कुमार द्विवेदी
छात्र(मा.रा.प.विवि,भोपाल)

Wednesday, August 11, 2010

बेकार की जद्दोजहद.......

नक्सली मुद्दा आज नेता समाजसेवी मंत्री हर किसी के लिए पहचान बनाने का जरिया बन गया है। कोई नक्सली को अपना हितैशी और राष्ट्रहित चिंतक बताकर, एक बात तो है आज नक्सलियों के बारे में कुछ भी यदि बेबाकी से आप उनके पक्ष में बोलते हैं तो वो सुपरहिट जरूर होगा...क्यों कि विवादों भरी बात यदि निकलती है तो उस सभी को एतराज होगा ऐसे में यदि कोई नक्सली को अपना हितैशी बताए राष्ट्रहित के बारे में सोचेंगे ये तो नहीं हो सकता..जहां नक्सलियों के बारे में यदि कोई कहता है कि वो बदल सकते हैं तो ये इतना आसान नहीं, क्यों कि नक्सली आज आम आदमी को अपना निशाना बनाने लगे हैं...ये बात ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस (मिदिनापुर कोलकाता) के घटना की बात ले या फिर बीजापुर को निशाना बनाया ये दोनो हादसे बताते हैं कि नक्सली आज किसी को अपना निशाना बना सकते हैं...
बात तो ये थी पुरानी नक्सली मामले से जुड़ी लेकिन सवाल ये खड़ा हो रहा है कि जो लोग अपने ही लोगों को मार देने उन्हे काट देने में अपनी बहादुरी समझते हैं उन पर इतनी दरिया दिली क्यों की जा रही है। लोग कुछ भी बोल दे रहे हैं..बेतुकी बाते बोलने में लालू यादव जैसे कई महानुभाव हुए जिन्होने नक्सलियों हित के बारे में बात कही आज उन्ही को शक की निगाह से देखा जाए तो मेरे ख्याल गलत नहीं होगा...। इन्ही नक्सली हितैशियों में आजकल जो नाम सबसे उपर आ रहा है वो समाजसेवी स्वामी अग्निवेश का जो नक्सली औऱ सरकार के बीच शांति वार्ता की बात करते करते अब इनके बीच मध्यस्तता कराने चले हैं। अग्निवेश जी एक बात और कह रहे हैं कि यदि 12 लाख के इनामी खूंखार नक्सली को नहीं मारा गया होता तो नक्सलियों की बिचार धारा अबतक बदल गई होती । सवाल ये क्या सरकार बेवकूफ है जो किसी को पकड़ने का मारने वाले को 12 लाख रूपए का इनाम देगी। सोचिए जिसके सिर पर 12 लाख रूपए का इनाम हो उसे आप क्या समझ सकते है। सोचने वाली बात ये है कि जो देश की उन्नति में रूकावट बनते हैं जो आमलोगों को अपना निशाना बनाते हैं उनपर राजनीति क्यों की जाती है। आज स्वामी अग्निवेश और लालू यादव जैसे लोग ही देश के विकाश में आज रूकावट बन रहे हैं।
कमलेश पाण्डेय